चार्टर एक्ट 1833

 चार्टर अधिनियम 1833

1813 के अधिनियम के बाद भारत में कंपनी के साम्राज्य में काफी वृद्धि हुई तथा महाराष्ट्र, मध्य भारत, पंजाब, सिंध, ग्वालियर, इंदौर आदि पर पर अंग्रेजों का प्रभुत्व स्थापित हो गया। इसी प्रभुत्व को स्थायित्व प्रदान करने के लिए 1833 का चार्टर अधिनियम पारित किया गया।

प्रावधान:

1. भारतीय प्रदेशों तथा राजस्व पर कंपनी के अधिकार को 20 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया किन्तु निश्चित कर दिया गया कि भारतीय प्रदेशों का प्रशासन अब ब्रिटिश सम्राट के नाम से किया जाएगा।

2. बंगाल के गवर्नर जनरल को "भारत का गवर्नर जनरल" बना दिया गया जिसमें सभी नागरिक व सैन्य शक्तियां निहित थी संपूर्ण भारत का प्रथम गवर्नर जनरल "लॉर्ड विलियम बैंटिक" बना।

3. सभी कर गवर्नर जनरल की आज्ञा से ही लगाए जाने थे और उसे ही इसके व्यय का अधिकार दिया गया।

4. कंपनी के चाय तथा चीन के साथ व्यापार के एकाधिकार को समाप्त कर उसे पूर्णतया प्रशासनिक और राजनीतिक संस्था बना दिया गया।

5. अंग्रेजों को बिना अनुमति भारत में आने तथा रहने की आज्ञा दी गई । वे भारत में भूमि भी खरीद कर सकते थे।
6. सपरिषद गवर्नर जनरल को ही भारत के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया गया तथा मद्रास और बंबई की कानून बनाने की शक्ति समाप्त कर दी गई।

7. गवर्नर जनरल की परिषद में एक चौथा सदस्य "विधि विशेषज्ञ" के रूप में बढ़ा दिया गया।

8. भारतीय कानूनों को संचालित संहिताबद्ध तथा सुधारने की भावना से एक विधि आयोग की नियुक्ति की गई। इस आयोग का प्रथम अध्यक्ष "लार्ड मैकाले" था जो कि गवर्नर जनरल के परिषद में विधि विशेषज्ञ की हैसियत से भी था।

9. कंपनी के प्रदेशों में रहने वाले किसी भारतीय को केवल धर्म,वंश, जाति, रंग या जन्म स्थान इत्यादि के आधार पर कंपनी के किसी पद से जिसके वह योग्य हो वंचित नहीं किया जाएगा। हालांकि "कोर्ट आफ डायरेक्टर्स" के विरोध के कारण इस प्रावधान को समाप्त कर दिया गया।

10. मुंबई तथा मद्रास के गवर्नरो की परिषद के सदस्यों की संख्या घटा कर 2 कर दी गई।

11. मुंबई तथा मद्रास को मुख्य सेनापति के धीन अपनी अलग -अलग सेनाएँ रखनी थी किंतु उनका नियंत्रण केंद्र सरकार के अधीन ही रखा गया।

12. आगरा तथा पश्चिमी अवध को सम्मिलित करके एक नवीन प्रांत "उत्तर पश्चिम प्रांत" का गठन किया गया।

13. भारत में दास प्रथा को गैरकानूनी घोषित किया गया तथा गवर्नर जनरल को निर्देश दिया गया कि भारत से दास प्रथा को समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए ।भारत में दास प्रथा का उन्मूलन 1843 में लार्ड एलेनबरो द्वारा किया गया।

14. बोर्ड ऑफ कंट्रोल का प्रधान भारतीय मामलों का मंत्री बना दिया गया।

                                            ✍✍✍ शोभित अवस्थी

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